रहते बन कर खास कहें तो किससे बोलो… नगर श्री में हुई साहित्य गोष्ठी में साहित्यकारों ने जमाया रंग


डेजर्ट टाइम्स न्यूज़ – चूरूः लोक संस्कृति शोध संस्थान नगर श्री में रविवार शाम साहित्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। सचिव श्याम सुन्दर शर्मा ने बताया कि रविवार शाम को नगर श्री सभागार में पं. कुंज बिहारी शर्मा स्मृति में मासिक साहित्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। काव्य कलश कार्यक्रम अनन्तराम सोनी की अध्यक्षता व युवा शायर दीपक कामिल के सान्निध्य में हुआ। गोष्ठी का शुभारंभ मंगल व्यास भारती ने सरस्वती वंदना व मंगलाचरण से किया। उन्होंने अपनी कविताएं- रहते बन कर खास कहें तो किससे बोलो…, धन दौलत यूं एक सी सदा न रहती समान…, जाने कैसा ये युग आया…। गीता रावत ‘गाफिल’ ने उम्र गुजार दी काम करते करते…, पंकज कुमार भार्गव ने ये किस तरह का तमाशा है शहर में…, विजयकांत शर्मा ने ना लड़ हम कभी मकान के लिए…, खेत मेरे को चाहिए बारिस मुसलाधार…, अब्दुल मन्नान ‘मजहर’ ने नज्म मेरा सदरा है सनद पैदाइसी सुल्तान…, इमरान ने मेरी दुनिया मेरे गम तुम से अच्छे मेरे सनम…, महेश कुमार ने मैं मदहोश गमां से क्या जानूं…, डॉ. श्यामसुन्दर शर्मा ने ये दुनिया हकीकत में फरेबो का पिटारा है…, तन्हाइयां में इतना सजाया न कीजिए…, कमल सिंह कोठारी ने स्मृतियां में बात अब तक… आशीष गौतम ‘आशु’ ने ना खुशी अच्छी है न मलाल अच्छा है, अपना तो हाल अच्छा है…, सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। विशिष्ट अतिथि दीपक ‘कामिल’ की गजलों-बाग से बागवां कहां जाए…, तेरा दिले नाशाद से है। अनन्तराम सोनी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन के पश्चात् कविता धरती पर कितने महल बने, कुछ देव बने कुछ दूत बने…सुनाकर खूब सराहना पाई। कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार प्रो. कमल सिंह कोठारी ने किया।